NCERT SolutionsClass 10solution for chapter – 2 : अम्ल, क्षारक एवं लवण कक्षा 10 विज्ञान in hindi
solution for chapter – 2 : अम्ल, क्षारक एवं लवण कक्षा 10 विज्ञान in hindi
उत्तर(i) पारा (Mercury)
उत्तर(ii) सोडियम
उत्तर(iii) सिल्वर
उत्तर(iv) मर्करी तथा लेड
उत्तर: आघातवर्ध्य: ऐसे पदार्थ जिन्हें मारकर या पीटकर पतली परत में बदला जा सकता है, आघातवर्ध्य कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, अधिकतर धातुएँ इस गुण वाली होती हैं।
तन्य: ऐसे पदार्थ जिन्हें खींचकर पतले तार का रूप दिया जा सके, तन्य कहलाते हैं। उदाहरणस्वरूप, अधिकांश धातुओं में यह गुण पाया जाता है।
उत्तर: सोडियम बहुत अधिक क्रियाशील धातु होती है। यह हवा में मौजूद ऑक्सीजन और जलवाष्प के संपर्क में आते ही तेजी से प्रतिक्रिया कर सकता है और आग भी पकड़ सकता है। इसी कारण इसे सुरक्षित रखने तथा वायु के सीधे संपर्क से बचाने के लिए किरोसिन में डुबोकर रखा जाता है।
उत्तर:
(i) 3Fe (s) + 4H₂O (g) → Fe₃O₄ (s) + 4H₂ (g)
(ii)
Ca (s) + 2H₂O (l) → Ca(OH)₂ (aq) + H₂ (g) + ऊष्मा
2K (s) + 2H₂O (l) → 2KOH (aq) + H₂ (g) + ऊष्मा
उत्तर: (i) सारणी के अनुसार, जो धातु सबसे अधिक विलयनों के साथ प्रतिक्रिया करती है, वही सबसे अधिक अभिक्रियाशील होती है। अतः B सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
(ii) चूँकि B, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह कॉपर (II) सल्फेट के विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देगा और विलयन का रंग बदल जाएगा।
(iii) अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में धातुओं का क्रम है:
B > A > C > D
उत्तर: जब किसी अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है, तो हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है।
आयरन जब तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) के साथ अभिक्रिया करता है, तो आयरन (II) सल्फेट तथा हाइड्रोजन गैस बनती है।
Fe (s) + H₂SO₄ (aq) → FeSO₄ (aq) + H₂ (g)
उत्तर: जब जिंक को आयरन के लवण के विलयन में डाला जाता है, तो जिंक अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण आयरन को उसके विलयन से बाहर निकाल देता है। यह एक विस्थापन अभिक्रिया है।
रासायनिक अभिक्रिया:
Zn (s) + FeSO₄ (aq) → ZnSO₄ (aq) + Fe (s)
उत्तर:
(i)
सोडियम (Na) के बाह्य कक्षा में 1 इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए इसकी इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना Na· होती है।
ऑक्सीजन (O) के बाह्य कक्षा में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, अतः इसकी संरचना O के चारों ओर 6 बिंदुओं के रूप में दिखाई जाती है।
मैग्नीशियम (Mg) के बाह्य कक्षा में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इसकी संरचना Mg·· के रूप में दर्शाई जाती है।
(ii)
सोडियम अपना 1 इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ आयन बनाता है, जबकि ऑक्सीजन 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके O²⁻ आयन बनाती है। इस प्रकार Na₂O का निर्माण होता है।
इसी प्रकार मैग्नीशियम 2 इलेक्ट्रॉन त्यागकर Mg²⁺ बनाता है और ऑक्सीजन 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर O²⁻ बनाती है, जिससे MgO बनता है।
(iii)
इन यौगिकों में उपस्थित आयन इस प्रकार हैं:
Na₂O में Na⁺ और O²⁻ आयन पाए जाते हैं।
MgO में Mg²⁺ और O²⁻ आयन उपस्थित होते हैं।
उत्तर: आयनिक यौगिकों में धनायनों और ऋणायनों के बीच मजबूत आकर्षण बल होता है। इन बलों को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए इनका गलनांक उच्च होता है।
उत्तर:
(i) खनिज: पृथ्वी की परतों में स्वाभाविक रूप से मिलने वाले तत्व या उनके यौगिक खनिज कहलाते हैं।
(ii) अयस्क: वे खनिज जिनमें धातु पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो और जिनसे धातु को आसानी व लाभ के साथ निकाला जा सके, अयस्क कहलाते हैं।
(iii) गैंग: अयस्क के साथ पाई जाने वाली अनावश्यक अशुद्धियाँ, जैसे रेत, मिट्टी आदि, गैंग कहलाती हैं।
उत्तर: प्रकृति में बिना किसी यौगिक के स्वतंत्र रूप में मिलने वाली धातुओं के उदाहरण हैं—सोना और प्लैटिनम।
उत्तर: धातु को उसके ऑक्साइड से निकालने के लिए अपचयन (Reduction) की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
उत्तर: कम अभिक्रियाशील धातुएँ सामान्यतः आसानी से संक्षारण (corrosion) का शिकार नहीं होती हैं। उदाहरण के रूप में सोना, प्लैटिनम तथा चाँदी को लिया जा सकता है।
उत्तर: दो या दो से अधिक धातुओं अथवा धातु और अधातु के समान रूप से मिश्रित संयोजन को मिश्रातु कहा जाता है।
उत्तर (d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु
उत्तर: (c) जिंक की परत चढ़ाकर
उत्तर: (a) कैल्शियम
उत्तर: (c) जिंक, टिन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है
उत्तर:
(a) धातु और अधातु में भेद करने के लिए सबसे पहले हथौड़े का प्रयोग किया जा सकता है। यदि किसी पदार्थ को पीटने पर वह फैल जाता है, तो वह धातु है, जबकि यदि वह टूटकर बिखर जाता है, तो वह अधातु होता है। यह धातुओं के आघातवर्ध्य गुण को दर्शाता है।
इसके अलावा, बैटरी, बल्ब, तार और स्विच की सहायता से एक सरल विद्युत परिपथ बनाया जा सकता है। यदि परिपथ में नमूना जोड़ने पर बल्ब जल उठता है, तो वह धातु है, अन्यथा वह अधातु माना जाएगा।
(b) ये परीक्षण धातुओं और अधातुओं के बीच अंतर समझने में सहायक होते हैं क्योंकि ये उनके भौतिक गुणों, जैसे आघातवर्ध्यता और विद्युत चालकता, पर आधारित हैं। इन विधियों में किसी प्रकार की रासायनिक क्रिया शामिल नहीं होती, इसलिए ये सरल और सुरक्षित मानी जाती हैं।
उत्तर: वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं। उदाहरण के रूप में एलुमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड को लिया जा सकता है।
उदाहरण (एलुमिनियम ऑक्साइड):
Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O
Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O
उत्तर: आयरन और एलुमिनियम ऐसी धातुएँ हैं जो तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस को बाहर निकाल देती हैं, क्योंकि ये हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील होती हैं।
इसके विपरीत, मर्करी और ताँबा तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर पाती हैं, क्योंकि इनकी अभिक्रियाशीलता हाइड्रोजन से कम होती है।
उत्तर: विद्युत् अपघटनी परिष्करण में—
ऐनोड: अशुद्ध धातु M को ऐनोड के रूप में लिया जाता है।
कैथोड: शुद्ध धातु M की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है।
विद्युत् अपघट्य: धातु M के लवण का जलीय विलयन विद्युत् अपघट्य के रूप में प्रयोग किया जाता है।
उत्तर:
(a)
(i) सूखे लिटमस पत्र पर कोई परिवर्तन नहीं होता है।
(ii) आर्द्र लिटमस पत्र पर यह गैस नीले लिटमस को लाल कर देती है, क्योंकि यह अम्लीय प्रकृति की होती है।
(b)
सल्फर को गर्म करने पर सल्फर डाइऑक्साइड गैस बनती है:
S (s) + O₂ (g) → SO₂ (g)
यह गैस जल के साथ अभिक्रिया करके सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है:
SO₂ (g) + H₂O (l) → H₂SO₃ (aq)
उत्तर: लोहे को जंग लगने से रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
पेंट, तेल या ग्रीज़ लगाकर: लोहे की सतह पर पेंट, तेल या ग्रीज़ लगाने से वह हवा और नमी के सीधे संपर्क में नहीं आता, जिससे जंग लगने की संभावना कम हो जाती है।
यशद्लेपन (गैल्वनाइजेशन): इस विधि में लोहे पर जिंक की पतली परत चढ़ाई जाती है, जो उसे ऑक्सीजन और नमी से बचाती है, परिणामस्वरूप जंग नहीं लगती।
उत्तर:
अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके प्रायः अम्लीय तथा कुछ मामलों में उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।
अम्लीय ऑक्साइड: NO₂, SO₂
उदासीन ऑक्साइड: NO, CO
उत्तर:
(a) प्लैटिनम, सोना और चाँदी का उपयोग आभूषणों में किया जाता है क्योंकि ये चमकदार होते हैं, आसानी से आकार दिए जा सकते हैं और बहुत कम अभिक्रियाशील होने के कारण जल्दी खराब या जंगग्रस्त नहीं होते।
(b) सोडियम, पोटैशियम और लीथियम बहुत अधिक क्रियाशील धातुएँ हैं। ये वायु में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी के साथ तुरंत प्रतिक्रिया कर सकती हैं, इसलिए इन्हें तेल के अंदर सुरक्षित रखा जाता है ताकि इनका संपर्क हवा से न हो।
(c) यद्यपि ऐलुमिनियम अभिक्रियाशील है, फिर भी इसकी सतह पर ऑक्सीजन के संपर्क में एक पतली ऑक्साइड परत बन जाती है, जो इसे आगे क्षरण से बचाती है। साथ ही यह हल्का और ऊष्मा का अच्छा चालक है, इसलिए बर्तन बनाने में उपयोगी है।
(d) धातु के निष्कर्षण में कार्बोनेट और सल्फाइड अयस्कों को पहले ऑक्साइड में बदला जाता है क्योंकि ऑक्साइड से धातु प्राप्त करना अपेक्षाकृत सरल और सुविधाजनक होता है।
उत्तर: वायु में उपस्थित ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और नमी के प्रभाव से ताँबे की सतह पर हरे रंग की परत बन जाती है, जिससे उसकी चमक कम हो जाती है।
नींबू या इमली के रस में उपस्थित अम्ल इस परत के साथ अभिक्रिया करके उसे घुलनशील पदार्थों में बदल देते हैं, जिन्हें आसानी से पानी से धोकर हटाया जा सकता है। इस प्रक्रिया से ताँबा फिर से चमकदार दिखाई देने लगता है।
उत्तर:
रासायनिक गुणों के आधार पर धातु और अधातु में निम्न अंतर पाए जाते हैं—
धातुएँ:
धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः क्षारीय या उभयधर्मी ऑक्साइड बनाती हैं।
ये अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं।
धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (cation) बनाती हैं।
अधातुएँ:
अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके प्रायः अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।
ये सामान्यतः अम्लों के साथ हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं करती हैं।
अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (anion) बनाती हैं।
उत्तर:
संभावना है कि उस व्यक्ति ने एक्वा रेजिया नामक विलयन का उपयोग किया हो। यह सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) के मिश्रण से बना होता है, जिसका अनुपात 3:1 होता है।
यह विलयन सोना और प्लैटिनम जैसी कम अभिक्रियाशील धातुओं को भी घोल सकता है। इसी कारण कंगनों की ऊपरी परत का कुछ भाग घुल जाता है, जिससे उनका वजन घट जाता है, जबकि ऊपर से वे चमकदार दिखाई देते हैं।
उत्तर:
ताँबा गर्म जल या भाप के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करता, इसलिए यह सुरक्षित रहता है। इसके विपरीत, इस्पात में मौजूद लोहा जलवाष्प के साथ अभिक्रिया कर सकता है, जिससे क्षरण होने की संभावना रहती है।
इसके अलावा, ताँबा ऊष्मा का अच्छा चालक होता है, जिससे पानी को गर्म करने में सुविधा होती है। इसी कारण गर्म पानी के टैंक बनाने में ताँबे को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि इस्पात का उपयोग नहीं किया जाता।
solution for chapter – 2 : अम्ल, क्षारक एवं लवण कक्षा 10 विज्ञान in hindi
अध्याय 1 : रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण, प्रश्न-उत्तर समाधान सरल हिन्दी में कक्षा 10 विज्ञान
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